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It’s not just about Lal Kitab, It’s about knowing inner self

Astrologer Sahu Ji – Indore

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सूर्य ग्रह – Sun

लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह को सबसे प्रभावशाली ग्रह माना गया है। यह सभी ग्रहों का स्वामी कहलाता है। सूर्य ग्रह भावों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह कारगर होते हैं। हालाँकि सूर्य ग्रह शांति के लिए लाल किताब के उपाय बहुत ही कारगर होते हैं। वैदिक ज्योतिष से अलग लाल किताब में सूर्य के प्रभाव और इससे संबंधित उपाय दिए गए हैं। इसके क्या उपाय हैं। नीचे प्रत्येक प्रभाव भाव पर सूर्य का प्रभाव और उससे संबंधित उपाय दिए गए हैं

चंद्र ग्रह – Moon

लाल किताब के अनुसार चंद्रमा कुंडली में चौथे भाव का स्वामी होता है। कुंडली में चौथा भाव माँ का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है। यह कर्क राशि का स्वामी होता है। सभी ग्रहों में चंद्रमा का गोचर सबसे कम अवधि का होता है। यह एक राशि में लगभग सवा दो या ढाई दिन रहता है। सूर्य, मंगल और गुरु से चंद्रमा की मित्रता है। अपने मित्र ग्रहों के साथ चंद्रमा का फल अच्छा होता है।

मंगल ग्रह – Mars

लाल किताब के अनुसार मंगल mars एक ऐसा ग्रह है जो अपने नाम के अनुरूप मंगलकारी भी है और नाश करने वाला भी है। हालाँकि मंगल ग्रह को लेकर, लोगों की धारणाएँ ज्यादातर नकारात्मक ही रहती है। लाल किताब में सूर्य (sun), चंद्रमा (moon) और बृहस्पति (jupiter) ग्रह को मंगल का मित्र और बुध ग्रह को शत्रु बताया गया है। वैदिक ज्योतिष में जहाँ मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक का स्वामी है। वहीं लाल किताब में इसे पहले और आठवें खाने का मालिक कहा गया है।

बुध ग्रह – Mercury

लाल किताब में बुध ग्रह को हरा ग्रह बताया गया है। बुध ग्रह का यह हरा रंग बृहस्पति के पीले और राहु के नीले रंग को मिलाने के बाद बनता है। अर्थात बृहस्पति और राहु के एकत्रित होने में बुध का प्रभाव देखने को मिलेगा। हालाँकि सूर्य, शुक्र और राहु, बुध के मित्र ग्रह हैं। जबकि चंद्रमा ग्रह बुध का शत्रु कहलाता है। वहीं लाल किताब के इतर, वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को एक तटस्थ ग्रह माना गया है, जो कि शुभ ग्रहों के साथ मिलकर अच्छे फल देता है और अशुभ ग्रहों के साथ इसकी युति जातकों के लिए अशुभ होती है।

गुरु ग्रह – Jupiter

लाल किताब में बृहस्पति को एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। पीपल, पीला रंग, सोना, हल्दी, चने की दाल, पीले फूल, केसर, गुरु, पिता, वृद्ध पुरोहित, विद्या और पूजा-पाठ यह सब बृहस्पति के प्रतीक माने गये हैं।बृहस्पति ग्रह मान, प्रतिष्ठा और उत्पत्ति का कारक है लेकिन निर्बल होने पर बृहस्पति के यह सभी गुण पलभर में खत्म हो जाते हैं। जातक अपने कर्मों के द्वारा अपनी जन्म कुंडली के प्रबल और उत्तम बृहस्पति को, जो चतुर्थ भाव में अच्छा फल देने वाला होता है, उसे निर्बल कर लेता है। पिता, बाबा, दादा, ब्राह्मण और बुजुर्गों को निरादर करने से उत्तम बृहस्पति निष्फल हो जाता है।

शुक्र ग्रह – Venus

लाल किताब के अनुसार शुक्र एक रूप से सुन्दर ग्रह है। शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति को भौतिक और सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। शुक्र ग्रह प्रेम, वासना, जमीन, जीवनसाथी, गृहस्थी सुख और विवाह का कारक होता है। मनुष्य के अंदर प्रेम की भावना का नाम शुक्र है। इसके लिए व्यक्ति रुपया, पैसा, भूमि, संपत्ति और धन-दौलत सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार हो जाता है। शुक्र ग्रह को लक्ष्मी जी का प्रतीक माना गया है। कुंडली में शुक्र की शुभ स्थिति जीवन को सुखमय और प्रेममय बनाती है और अशुभ स्थिति चारित्रिक दोष व पीड़ा उत्पन्न करती है।

शनि ग्रह – Saturn

ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्म भाव का स्वामी कहा जाता है। यह सेवा और नौकरी का कारक होता है। काला रंग, काला धन, लोहा, लोहार, मिस्त्री, मशीन, कारखाना, कारीगर, मजदूर, चुनाई करने वाला, लोहे के औजार व सामान, जल्लाद, डाकू, चीर फाड़ करने वाला डॉक्टर, चालाक, तेज नज़र, चाचा, मछली, भैंस, भैंसा, मगरमच्छ, सांप, जादू, मंत्र, जीव हत्या, खजूर, अलताश का वृक्ष, लकड़ी, छाल, ईंट, सीमेंट, पत्थर, सूती, गोमेद, नशीली वस्तु, मांस, बाल, खाल, तेल, पेट्रोल, स्पिरिट, शराब, चना, उड़द, बादाम, नारियल, जूता, जुराब, चोट, हादसा यह सब शनि से संबंधित है।

राहु ग्रह – Rahu

 वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु एक छाया ग्रह है जिसका कोई भी भौतिक स्वरूप नहीं है। हिन्दू ज्योतिष में राहु को एक पापी ग्रह माना गया है। ज्योतिष में राहु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन मिथुन राशि में यह उच्च होता है और धनु राशि में यह नीच भाव में होता है।लाल किताब के अनुसार, सूर्य के साथ शनि या शुक्र हो तो राहु का प्रभाव मंदा हो जाता है। हालाँकि कमजोर राहू चंद्रमा के उपाय के लिए सहायक है। क्योंकि चंद्रमा से राहु शांत होता है। परंतु राहु को शांत करने में चंद्रमा का प्रभाव कमज़ोर हो जाता है।

केतु ग्रह – Ketu

लाल किताब के अनुसार केतु ग्रह कभी सीधी चाल नहीं चलता है। बल्कि यह उल्टी चाल (वक्री) चलता है। केतु कुंडली के द्वादश भाव (बारहवाँ खाना) का स्वामी होता है। यदि किसी की कुंडली में यह खाना सोया हुआ है तो इस खाने को सक्रिय करने के लिए केतु के उपाय करने चाहिए। लाल किताब के अनुसार केतु व्यक्ति के चाल-चलन, चारपाई, कुत्ता, भिखारी, पुत्र, मामा, पोता, भांजा, भतीजा, कान, जोड़, पैर, सलाह देने वाला, चितकबरा, नींबू, रात-दिन का मेल, दूर की सोचने वाला आदि का प्रतिनिधित्व करता है।

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When life takes a turn toward the unexpected course of life, things become quite confusing. This is time we look out for some real measures in all direction. During such times taking refuge under guidance of astrology can prove extremely beneficial.

by: Astrologer Sahu Ji (Lal Kitab Astrologer in Indore)

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